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की की माला बिहिरी पाणी सुर्य सुजान आकाश को जीवन को समझो तरस गयी तरा सृष्टी जीवन की गहराई पाणी को संचय शब्दों गोकुल जीवन की सच्चाइयों को बयां करती गज़ल कीस्मत की मारी माँ हाथों अमृत पोवारी कविता

Hindi पाणी की बुंद को Poems